यह कविता मेरे जीवन की सच्चाई है.... यह कविता मेरे जीवन की सच्चाई है....
जीवन भर पिता जो संतानों के लिए करते, मुश्किल आँंकना उनका मोल है। जीवन भर पिता जो संतानों के लिए करते, मुश्किल आँंकना उनका मोल है।
प्रेयसी न सही तुम्हारी पुजारन थी ऐसा ही जग को जताना चाहती हूँ। प्रेयसी न सही तुम्हारी पुजारन थी ऐसा ही जग को जताना चाहती हूँ।
मेरे सेंटा मेरे पापा साथ हर दिन निभाते हैं रात हो या दिन मेरी हर मुस्कराहट की खातिर मेरे सेंटा मेरे पापा साथ हर दिन निभाते हैं रात हो या दिन मेरी हर मुस्कर...
बाँस की हँस कर दोहरी होती टहनियाँ,जब बाँसुरी बन सजती हैं,कहती हैं व्यथा बिछोह की,किसी गडरिये के होठो... बाँस की हँस कर दोहरी होती टहनियाँ,जब बाँसुरी बन सजती हैं,कहती हैं व्यथा बिछोह की...
ऐसे ही मन के विचारों को कविता में बाँधा है, जो छू जाये मन को,ऐसा लक्ष्य साधा है। ऐसे ही मन के विचारों को कविता में बाँधा है, जो छू जाये मन को,ऐसा लक्ष्य साधा है।